• July 14, 2020

Success Story: पत्नी को सताती थी मायके के ताजमहल की याद, पति ने ससुराल में बना दी फनसिटी

अनिल अग्रवाल और अमिता अग्रवाल के बुलंद हौसलों की कहानी है फनसिटी, बरेली वालों को फैमिली पिकनिक प्वाइंट देने की सोच लेकर किया गया था निर्माण
संसाधनों की कमी के बावजूद पति-पत्नी के बुलंद इरादों ने बरेली को दिया प्रदेश का सबसे बड़ा एम्यूजमेंट पार्क, सबसे विशाल पार्किंग वाला बारातघर भी बनाया फनसिटी के पास
परिवार के साथ समय बिताने की सबसे अच्छी जगह है फनसिटी, रोजाना हजारों लोग आते हैं परिवार और दोस्तों के साथ, लॉकडाउन खत्म होने के बाद खोला जाएगा लोगों के लिए

द इंडिया राइज
कहते हैं कि चाह लो तो फिर कुछ भी नामुमकिन नहीं। बस हौसले में दम और इरादों में नेकी होनी चाहिए। बरेली में फन सिटी बनने की कहानी कुछ ऐसी ही है। आगरा की बेटी अमिता अग्रवाल बहु बनकर बरेली के पेट्रोलियम कारोबारी अनिल अग्रवाल के घर आईं। अमिता उस शहर से थीं जहां दुनिया का सातवां आश्चर्य है। लोगों के पास घूमने फिरने की तमाम जगह हैं। जहां वो मनोरंजन करने के साथ-साथ भारत के सुनहरे इतिहास से भी रूबरू हो सकते हैं। अमिता अक्सर सोचती थीं कि काश बरेली में भी कुछ ऐसा होता जहां लोग अपने घर परिवार के साथ छुट्टी वाले दिन या वीकेंड पर आराम से घूम पाते। एक ऐसी जगह जहां उन्हें अपनापन मिले और वक्त गुजारने में आसानी हो।
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जैसे-जैसे वक्त आगे बढ़ता गया, अमिता अपने पति अनिल अग्रवाल को उनके बिजनेस में सहयोग करती चली गईं। एक दिन उन्होंने अपने मन की बात अनिल अग्रवाल जी से कही। अनिल अग्रवाल ने कहा कि यह आगरा नहीं है, जहां ताजमहल है और लोग आराम से अपने परिवार के साथ घूमने फिरने जाते हैं। अमिता ने कहा कि कुछ तो ऐसा हो सकता है जो बरेली में सबसे अलग हो और जहां लोग आराम से पूरे परिवार के साथ घूमने आ सकें। बस, यहीं पर उनके दिमाग में फन सिटी बनाने का आईडिया आया। अमिता ने अपनी बात अनिल अग्रवाल से कही, प्रोजेक्ट बहुत जोखिम भरा था। लिहाजा कुछ दिन के चिंतन मंथन के बाद अनिल अग्रवाल इसके लिए तैयार हो गए।
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आर्किटेक्ट अनुपम सक्सैना ने तैयार किया प्रोजेक्ट
अनिल अग्रवाल और अमिता अग्रवाल ने तैयारी करने के बाद अपने मन की बात आर्किटेक्ट अनुपम सक्सेना से साझा की। अनुपम सक्सेना ने दोनों को इस प्रोजेक्ट के बारे में सोचने के लिए बधाई दी और इसे मूर्त रूप देने की जिम्मेदारी ली। उन्होंने फनसिटी को शानदार ढंग से डिजाइन किया। अनुपम सक्सेना प्रकृति प्रेमी हैं, लिहाजा प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले ही उन्होंने अनिल अग्रवाल और अमिता अग्रवाल के सामने यह शर्त रखी कि फनसिटी में हरियाली का पूरा ध्यान रखा जाएगा। बेवजह कोई भी पेड़ नहीं काटा जाएगा। यहां काफी बड़ा ओपन स्पेस होगा जिसमें लोग आराम से बैठ सकेंगे। साथ ही, पूरे प्रोजेक्ट में पहले से लगे पेड़ों को नहीं काटा जाएगा। रजामंदी के बाद वह इस प्रोजेक्ट को करने के लिए तैयार हो गए।

प्रोजेक्ट देखकर बैंकों ने खड़े किए हाथ
अमिता अग्रवाल और अनिल अग्रवाल को सबसे अधिक हताशा तब हुई जब बैंकों ने उनके प्रोजेक्ट को फाइनेंस करने से मना कर दिया। बैंक यह तो मान रहे थे कि प्रोजेक्ट बहुत अच्छा है मगर इसके रिस्की होने की दुहाई देकर फाइनेंस करने को तैयार नहीं थे। ऐसे में दोनों के लिए इस प्रोजेक्ट के लिए फंड जुटाना बहुत बड़ी चुनौती थी। मगर उन्होंने हर हाल में काम शुरू करने का फैसला किया।
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कदम आगे बढ़ाए तो रास्ता मिलता गया रास्ता
दोनों ने फनसिटी के रूप में लोगों को एक नया पिकनिक स्पॉट देने की ठानी और हर हाल में इसे मूर्त रूप देने का संकल्प लिया। दोनों दिन रात मेहनत में जुटे और पैसों का इंतजाम करके काम शुरू कर दिया। धीरे-धीरे सनसिटी अपना मूर्त रूप लेने लगी। बीच-बीच में मुश्किलें आती रहीं मगर वो उनके हौसलों के आगे ज्यादा देर तक टिक नहीं पाईं।

दो साल में बनकर तैयार हुआ प्रोजेक्ट
फनसिटी का काम 2000 में शुरू हुआ और 2001 के अंत में यह प्रोजेक्ट बनकर चालू हो गया। उस वक्त प्रदेश का सबसे बड़ा एम्यूज़मेंट पाक था, जो अब भी है। यूपी में दूसरे एम्यूज़मेंट पाक की खुले हैं मगर फनसिटी जितना विराट रूप किसी दूसरे का नहीं है। इतनी हरियाली और ओपन स्पेस कहीं और नहीं है।

प्री वेडिंग शूटिंग पॉइंट बनाने की तैयारी
फनसिटी में कुछ नई राइड लगाने के साथ ही अब प्री वेडिंग शूटिंग प्वाइंट और टिक टॉक शूटिंग पॉइंट बनाने की तैयारी चल रही है। प्री वेडिंग शूटिंग पॉइंट काफी हद तक बनकर तैयार हो गया है। कोरोना का प्रभाव खत्म होने के 15 से 20 दिन बाद इसे आम लोगों के लिए खोला जाएगा।
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बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरू की एक उम्मीद
कारोबार आगे बढ़ाने के बाद अमिता अग्रवाल ने समाज की निर्धन बेटियों को स्वावलंबी बनाने के लिए एक सामाजिक संस्था एक उम्मीद शुरू की। उन्होंने राजेंद्र नगर और संजय नगर में शहर की तमाम दूसरी सक्रिय महिलाओं के सहयोग से दो बड़े ट्रेनिंग सेंटर खोले। यहां अब तक 15 सौ से अधिक बेटियों को सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, बागवानी, मेहंदी, रंगोली, क्राफ्ट मेकिंग समेत तमाम दूसरी चीजों की ट्रेनिंग दी जा चुकी है। ट्रेनिंग सेंटर पर ट्रेनिंग लेने के बाद बेटियां आत्मनिर्भर हो रही हैं। अमिता अग्रवाल ने बताया कि उनका यही मकसद है कि बेटियों को किसी के आगे हाथ न फैलाने पड़ें। निर्धन परिवार में पैदा होना कोई खराबी नहीं है बेटियां अगर मेहनत करें तो वह समाज के किसी भी क्षेत्र में खुद को साबित कर सकती हैं। यही प्रेरणा लेकर उन्होंने एक उम्मीद संस्था शुरू की है।
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शहर को दिया शानदार सेल्फी प्वाइंट
फनसिटी परिवार ने शहर को शानदार सेल्फी प्वाइंट दिया है। संजयनगर पेट्रोल पंप के पास बने सेल्फी प्वाइंट पर आईलव बरेली लिखा हुआ है। यहां सुबह से शाम तक तमाम लोग सेल्फी लेने आते हैं। इसी बहाने लोग अपने शहर के प्रति अपना प्रेम भी दर्शाते हैं।

परिवार है सबसे बड़ी ताकत
अमिता अग्रवाल ने बताया कि उनका परिवार ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। पति अनिल अग्रवाल के साथ बेटे ध्रुव अग्रवाल और पुत्रवधू महक अग्रवाल उनका पूरा सहयोग करते हैं। बेटी तृषा अग्रवाल दामाद वरुण अग्रवाल भी उन्हें बीच-बीच में अच्छे सुझाव देते हैं। यही नहीं उनकी नन्ही सी पोती श्रीनिका भी काफी एक्टिव रहती हैं। श्रीनिका ने पिछले दिनों फनसिटी में पौधारोपण भी किया था। प्रकृति प्रेमी श्रीनिका पौधारोपण और पक्षियों को संरक्षण देने के लिए अभी से बहुत एक्टिव हैं
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बरेली के लिए कुछ भी करने को तैयार
अमिता अग्रवाल ने बताया कि उनका परिवार अपने शहर बरेली से बहुत प्यार करता है। बरेली को बेहतरीन पिकनिक स्पॉट देने और बेटियों के लिए ट्रेनिंग कॉलेज शुरू करने के साथ ही वह बरेली में समाजसेवा के क्षेत्र में हर संभव सहयोग देने को तैयार हैं। जहां भी उनकी जरूरत होती है वह हमेशा अपनी टीम के साथ हाजिर रहती हैं। बरेली में कोरोना का प्रभाव बढ़ने के बाद उन्होंने एक उम्मीद संस्था में काम कर रही बेटियों से मास्क बनवाकर पुलिसवालों और समाज के अलग-अलग लोगों को बंटवाए। उन्होंने कहा कि किसी की मदद करने के बाद खुद को जो सुकून मिलता है उसे शब्दों में बयां कर पाना संभव नहीं है।

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