• July 14, 2020

तन और मन दोनों को स्वस्थ रखती है होम्योपैथी: डॉ. विकास वर्मा

DR VIKAS VERMA

बरेली के जाने माने चिकित्सक डॉ. विकास वर्मा मौसमी बीमारियों और होम्योपैथी के बारे में बता रहे हैं कुछ बेहद काम की बातें, एक बार जरूर पढ़ें।
डॉक्टर विकास वर्मा और उनकी पत्नी सुमन वर्मा नामी होम्योपैथिक चिकित्सक होने के साथ ही प्रगतिशील किसान भी हैं, वो इंसानों के साथ बीमार पेड़ पौधों का इलाज भी करते हैं

द इंडिया राइज
बदलते मौसम में मौसमी बीमारियां उन लोगों को ज्यादा तंग करती हैं, जिनकी रोग प्रतिरोधक शक्ति कमजोर हो गई है। रोग प्रतिरोधक क्षमता कई बड़ी बीमारियों, संक्रमण, और एलर्जी  से शरीर को  बचने में और लड़ने में मदद करती है। होम्योपैथी किसी इंसान के पूरे लक्षण देने के बाद उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा देती है। यानी, अगर आपको तन और मन दोनों स्वस्थ रखने हैं तो होम्योपैथी इसमें आपकी 100 फीसदी मदद कर सकती है।
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वातावरण में मौजूद तमाम बैक्टीरिया और वायरस को हम लगातार सांस के जरिये अंदर लेते रहते हैं, लेकिन ये बैक्टीरिया हमें नुकसान इसलिए नहीं पहुंचा पाते क्योकिं हमारा प्रतिरोधक तंत्र इनसे हर समय लड़ते हुए इन्हें परास्त करता रहता है। कई बार जब इन बाहरी कीटाणुओं की ताकत बढ़ जाती है या यूं कहें कि शरीर का रोग प्रतिरोधक तन्त्र कमज़ोर होता है तो ये शरीर के प्रतिरोधक तंत्र को भेद जाते हैं। परिणामस्वरूप कई मौसमी बीमारियां हमें घेर लेती हैं।  जहाँ तक एलर्जी का सवाल है कुछ को किसी चीज़ से एलर्जी होती है कुछ को उस चीज से नहीं होती। इसकी वजह यह है कि जिस शख्स को एलर्जी हो रही है, उसका प्रतिरोधक तंत्र उस चीज पर रिऐक्शन कर रहा है, जबकि दूसरों का तंत्र उसी चीज पर सामान्य व्यवहार करता है।

आखिर क्यों  घट रही है लोगों में इम्यूनिटी
अनियमित खानपान, अनिद्रा, दिमागी तनाव,  देर रात तक कार्य करने की आदत, स्वचिकित्सा  और अनियमित दिनचर्या के कारण लोगों में इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) घट रही है। इसके अलावा मौसम बदलाव के दौरान भी बाहरी बैक्क्टेरिया व वारयस ज्यादा शक्तिशाली हो जाते है और इस समय शरीर में कई तरह के वारयस अटेक करते हैं जिससे हमारी इम्यून क्षमता प्रभावित होती है।

होम्योपैथी में जीवनदायनी शक्ति यानी वाइटल फोर्स का सिद्धांत काम करता है
चूंकि यह पद्धति रोग से ऊपर रोगी को रखती है और इसका मानना है हर व्यक्ति एक अलग इकाई है और सबकी दवा भी अलग है, हर मरीज़ के लक्षण उसकी हिस्ट्री, उसकी मानसिक स्तिथि, आदि का बारीकी से अध्धयन करने के उपरांत ही उपयुक्त दवा निकाली जाती है, जो उसकी कांस्टीट्यूशनल दवा कहलाती है,  इम्युनिटी को बढ़ाना ही होम्योपैथी का आधार है।
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मानव शरीर हो या पेड़ पौधे सभी का शरीर वाइटल फोर्स से ही कंट्रोल होता  है। अगर शरीर का वाइटल फोर्स असंतुलित है तो शरीर में बीमारियां बढ़ने लगेंगी। होम्योपैथी में मरीज को ऐसी दवा दी जाती है, जो उसकी वाइटल फोर्स को सही स्थिति में ला देेती है । वाइटल फोर्स ही बीमारी को खत्म करता है, होमियोपैथी में इम्यूनिटी बढ़ाने की कई दवा है जो की सिर्फ और सिर्फ योग्य चिकित्सक से उपयुक्त परामर्श उपरांत लेना चाहिए। स्वचिकित्सा से बचना चाहिए।

जिस तरह से इंसानों में रोग प्रतिरोधक शक्ति का संतुलन बने रहने से बीमारियां दूर रहती है उसी प्रकार पेड़ पौधों के भी इम्यून सिस्टम को भी होम्योपैथी संतुलित रखती है और उनमें लगने वाले सामान्य रोगों केअलावा वायरल बीमारियों के उपचार में अभूतपूर्व परिणाम मिलते है। अधिकांशतः सही होम्योपैथी दवा लेने वालों को चाहे  मौसमी बीमारियों हो या कोई वायरल संक्रमण आम तौर पर परेशान नहीं करते और व्यक्ति सेहतमंद रहता है।

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