• July 14, 2020

बार बार विवादों में क्यों फंस जाते हैं बाबा रामदेव

योगगुरु रामदेव आए दिनों किस न किसी विवादों में घेरे दिखते हैं। हां, बस वो चर्चा उनके योग को छोड़ कर बाकी सभी मुद्दों पर रहती है। दो साल पहले जाने माने मीडिया हाउस के एक चर्चित शो में जब बाबा रामदेव गए तो वहां उन्होंने कहा कि

“मैं अपने प्रोडक्ट का विज्ञापन खुद करता हूं ! इतने में सीनियर जर्नलिस्ट और एंकर ने कहा कि आंकड़ों के मुताबिक स्वामी रामदेव एक हफ्ते में 2 लाख 34 हजार बार टी वी पर आए।  यानी हर तीस सेकंड बाद आप माल बेच रहे हैं।  

यह बात तो सच है कि आज पतंजलि का कोई भी प्रोडक्ट बाजार में आता है तो लोग उसे आंख मूंदकर भरोसा कर लेते हैं। सच्चाई तो यह है कि लोग प्रोडक्ट की डिटेल्स भी नहीं पड़ते अगर वो प्रोडक्ट रामदेव का है तो।

बाबा का भाग्य अच्छा था कि भारत में घर-घर में योग की पहल प्रधानमंत्री मोदी ने की। और 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाने लगा। इससे बाबा की पहुंच और भी बढ़ गई।

वहीं दुर्भाग्य से अपने नए नए प्रोडक्ट को लॉन्च करने पर वो सवालों के घेरे में फंस जाते हैं। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा कि पतंजलि के प्रोडक्ट पर पहली बार सवाल उठाए जा रहे हैं। इससे पहले भी नूडल्स और जींस को लेकर वो विवादों में फसे दिखे थे।

योग और आयुर्वेदिक दवाओं की बात तो समझ आती है लेकिन कालाधन अनशन और किम्भो ऐप के लॉन्च करने से बाबा सवालों के घेरे में नहीं बल्कि खुद एक सवाल बन गए थे।

बता दें, कि किम्भो ऐप को 30 मई 2018 को लॉन्च किया गया था। किम्भो एक संस्कृति शब्द है, जिसका हिंदी में अर्थ है कैसे हो इसे मैसेंजर ऐप व्हाट्सएप की टक्कर में उतारा गया था। जिसकी टैगलाइन थी अब भारत बोलेगा खैर जब भी, कभी भी, किसी विदेशी वस्तु का विरोध किया जाता है बाबा अपना स्वदेशी प्रोड्क्ट रेडी रखते हैं।

जैसा कि साल 2015 में मैगी के विरोध में बाबा पतंजलि आटा नूडल्स लाए थे। फिर साल 2018 में किम्भो को। दिलचस्प बात तो यह है कि स्वदेशी की माला जपने वाले बाबा रामदेव पर फ्रांस के एक एथिकल हैकर ने एलियट एल्डरसन ने दावा किया था की यह एक अमेरिकी कंपनी जो बंद हो चुकी मैसेजिंग ऐप बोलो है जिसे किम्भो के नाम से पेश किया गया है।

इसके साथ ही कई लोगों ने कहा कि OTP मैसेज का फॉर्मेट भी नहीं बदला है। और न ही कोई टेम्पलेट।

बात अगर इन दिनों की करें तो बाबा फिर अपने नए प्रोडक्ट के साथ सामने आए हैं। जहां बाबा रामदेव ने कोरोना जैसी महामारी से बचने के लिए दवा का दावा कर रहे हैं।

बाबा रामदेव का कहना है कि दवाओं के ट्रायल के दौरान तीन दिन के भीतर ही 69 फीसदी रोगी और एक सप्ताह में 100 फीसदी रोगी मरीज नेगेटिव हो गए हैं। अगर वाकई में ये दवाई इतनी कारगर है तो यह किसी चमत्कार से कम नहीं। हो सकता था कि इस दवा को संजीवनी बूटी के तौर पर याद किया जाता। लेकिन अफसोस ऐसा हुआ नहीं।

मौजूदा सरकार ने योग और आयुर्वेद को लेकर मेडिकल साइंस के समानांतर जगह दिलाने को लेकर हर संभव प्रयास किए हैं। आयुष मंत्रालय को जैसे ही इस बात की भनक लगी उन्होंने रामदेव की कोरोनिल पर जांच बैठा दी है। हालांकि बालकृष्ण का कहना है कि यह कम्युनिकेशन गैप की वजह से हुआ है।

खबरों के मुताबिक आयुष मंत्रालय के शुरुआती दौर में खबर आई थी कि आर्सेनिकल एल्बम नाम की दवा को कोरोना से बचाव में उतारा जा सकता है। लेकिन औपचारिक तौर पर सरकार की तरफ से कोई सहमति नहीं आई थी। आयुष मंत्रालय ने इम्युनिटी बढ़ाने के उद्देश्य से सिर्फ एक काढ़ा ही प्रमोट किया था।  कोई दावा नहीं किया था। जबकि रामदेव ने बिना परमिशन के सीधा दावा ठोक दिया है।

इन सब पर केंद्र सरकार ने साफ तौर पर कहा है, कि कोई भी कोरोना वायरस के इलाज के नाम पर दवा बना कर उसका प्रचार प्रसार नहीं कर सकता। सवाल घूम फिर के वहीं आ जा रहा है, कि रामदेव ने कैसे इस दवा (कोरोनिल) को इतने सारे दावों के साथ लॉन्च कर दिया है ?

अब जो भी हो रामदेव अब शक के घेरे में तो आए ही हैं साथ ही डिजास्टर मैनेजमेंट ऑथोरिटी एक्ट, 2005 के तहत अगर कोई व्यक्ति गलत दवाओं का दावा करता है तो उसे दंडनीय अपराध माना जाता है। ऐसे में अगर बाबा रामदेव का दावा गलत साबित होता है तो उसे कानून का उलंघन माना जाएगा। और इसके तहत 1 से 7 साल की सजा भी हो सकती है।

बाबा के लिए इतनी मुसीबत कम न थी कि उत्तराखंड सरकार के आयुर्वेद ड्रग्स लाइसेंस प्राधिकरण ने रामदेव की दवाओं पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। अथॉरिटी के डिप्टी डायरेक्टर यतेंद्र सिंह रावत के अनुसार पतंजलि को कोरोना की दवा के लिए नहीं बल्कि इम्युनिटी बूस्टर और खांसी जुखाम के लिए लाइसेंस मिला था। यतेंद्र सिंह रावत का कहना है, कि उन्हें इस बात की जानकारी मीडिया के माध्यम से लगी थी।

फिलहाल इन सब के चलते तो आज कई सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों को उनके प्रोडक्ट पर भरोसा था। अगर वो कोरोनिल की जगह कोई इम्यूनिटी बूस्टर लॉन्च करते तो भी लोग भाग दौड़ के ले लेते लेकिन कोरोनिल के आने के बाद से अब उनके बाकी प्रोडक्ट की बिक्री पर असर पड़ता साफ देखा जा सकता है।

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2013 और 2016 के बीच लिए गए पतंजलि के 82 सैंपल में से 32 प्रोडक्ट क्वालिटी टेस्ट में फेल हुए हैं।

 

 

 

 

 

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