• July 2, 2020

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50 साल के हुए राहुल गाँधी , कांग्रेस के युवराज के सामने है नयी चुनौतियां

हॉलीवुड कलाकार जिम कैरी कहते है : पचासवा साल वह समय होता है जब आपको यह चुनना होता है की लोग आपसे क्या चाहते है और आप वास्तव में क्या करना चाहते है | क्युकी यदि 50 साल की उम्र तक भी आप वह नहीं कर पा रहे जो आप करना पसंद करते है तो क्या बात है

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और अंतरिम कांग्रेस अध्यक्ष के बेटे राहुल गांधी का जन्म 19 जून 1970 में दिल्ली में हुआ. राहुल की पढ़ाई खास तौर से अमेरिका और इंग्लैंड से हुई. साल 2004 से राहुल ने राजनीति की चौखट पर कदम रखा. आज राहुल का 50वां जन्मदिन है. लेकिन कोरोना वायरस और भारत चीन की तनातनी की वजह से राहुल गांधी ने अपना जन्मदिन मनाने से मना कर दिया है. हालांकि इस खास दिन पर राहुल गरीबों  व जरुरतमंदो को राशन और भोजन का वितरण करेंगे.

राहुल गांधी एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखते हैं. जो ब्रिटिश कालीन से राजनीति में सक्रिय थे. इसलिए राहुल गांधी भी अब इस सत्ता को आगे बढ़ा रहे हैं. हालांकि पिछले साल चुनावों में कांग्रेस की हार के बाद उन्होंने अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया था. लेकिन राजनीति अभी भी इन्हीं के इर्द गिर्द ही घूमती है.

बता दें, कि राहुल गंधी अपने परिवार में सबसे पढ़े लिखे शख्स हैं. उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के ट्रिनिटी कॉलेज से डेवलपमेंट इकोनॉमिक्स में एम.फिल किया है.  माना यह भी जाता है, कि उन्होंने एक मैनजमेंट कंपनी में काम भी किया था. उसके बाद वे भारत लौट आए और साल 2004 में  उन्होंने अमेठी से चुनाव लड़ा और जीते भी. अमेठी से इसलिए क्योंकि यह उनके पिता का लोकसभा क्षेत्र था. राहुल गांधी ने उस समय 3,90,179 वोट से जीत अपने नाम दर्ज की थी. कुछ सालों तक राहुल ने सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखी लेकिन कुछ सालों बाद उनके बयानों और भाषण से विपक्ष पार्टी ने उनपर निशाना साधना शुरू कर दिया था.

खास तौर पर बाबरी मस्जिद वाले बयान पर उन्हें निशाना बनाया गया. बता दें, कि उस बयान में कहा गया था कि बाबरी मस्जिद के विध्वंस के वक्त गांधी परिवार का कोई भी शख्स राजनीति में प्रमुख रूप से  सक्रिय होता तो ऐसा नहीं होता  इस बयान के बाद से राहुल पर विपक्षी पार्टी ने निशाना साधना शुरू कर दिया था. (2007)

न्यूज वेबसाइट के मुताबिक वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई की कुछ लाइनें….

वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई ने कहा की अमूमन राजनीति की जिंदगी में 50 की उम्र में अकसर लोग कामयाबी और बुलंदियों पर बढ़ने लगते हैं. लेकिन राहुल गांधी के साथ यह दुर्भाग्य है, कि वो सफल नहीं रहे.

इसके लिए कोई और नहीं बल्कि वो खुद जिम्मेदार हैं. साल 2003 – 2004 में आए लेकिन 17 सालों में कोई भूमिका नहीं तय कर पाए.

राहुल गांधी सीधे तौर पर कांग्रेस का नेतृत्व करेंगे यह भी साफ नहीं है.

 

 

 

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